मै खुश हु....


मै खुश हु....
क्यों कि गम की कोई वजह नहीं....
मै खुश हु....
क्यों कि जीवन कोई सजा नहीं....
अपने लिए जीता था पहले अब औरो के लिए जीने लगा हु...
दुनिया के सामने हँसता हु भीतर में खून के आंशु रोने लगा हु....
मै खुश हु.....
क्यों कि अब मै आँखों में सपने संजोने लगा हु....
जिन्दगी भार लग रही थी कभी
मजबूरी से जिये जा रहा था मै.....
जख्म दे रही थी दुनिया
और उन जख्मो को सिये जा रहा था मै...
मै खुश हु....
क्यों कि अब मै नहीं रोता उन ख्वाबो के लिए
जो पुरे हो ना सके....
खुशिया सारी खो गई पर गम मेरे खो ना सके...
दोस्ती एक वरदान है सुना जब से ...गमो से ही दोस्ती कर ली हमने...
अब मै गमो की दुनिया में जीने लगा हु
मै खुश हु....
क्यों कि अब मै औरो के गम अपने कंधो पे ढोने लगा हु....
ये खुशिया प्यार करती थी कभी थी हम को भी
अब तो छुपाते है सिने में गम को भी
मुझे भी प्यार करो कोई मै अपना सब्र खोने लगा हु.
मै खुश हु...
क्यों कि मै गमो की बंज़र जमीन में फिर से खुशियों के बीज बोने लगा हु...
लिखने का शौक तो पहले भी था
पर आजकल शब्दों के मोती कुछ ज्यादा पीरोने लगा हु
आँखे बंद करता हु तो डर लगता है
इसलिए मै खुली आँखों से सोने लगा हु....
मै खुश हु...
क्यों कि...
अब मै नए दोस्त ढूंढने लगा हु....
मै खश हु....
क्यों कि अब मै खुशियों के बहाने ढूंढने लगा हु....

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