हमें सच मंजूर ही नहीं....

हमेशा सच बोलना चाहिए, झूट बोलना बहुत गलत बात है.... बचपन से सुना है... और यही मैंने अपने बेटे को सिखाया... वो सीख भी गया....
एक दिन मेरा बेटा मेरे पास आया और बोला पापा बाहर कोई अंकल आये है... अपना नाम राकेश शर्मा बताते है ...
आपसे मिलना चाहते है... ... राकेश शर्मा मेने पुराने मित्र है.. और बहुत ही चिपकू किस्म के इंसान है...
मैने धीरे से कहा , बेटा जाकर बोल दो कि पापा घर पर नहीं है , कही बाहर गए है...
मेरा बेटा बाहर गया और बोला पापा ने कहा है वो घर पर नहीं है , कही बाहर गए है....... राकेश समझ गया कि मै उससे नहीं मिलना चाहता, वो वहा से चला गया...
जब बच्चा अंदर लोट कर आया तो मैंने उसे डांट दिया... बच्चा बड़ी हैरानी से मेरी तरफ देख रहा था ............
जिस इंसान ने उसे बचपन से सिर्फ सच्चाई का पाठ पढाया है आज वो ही इंसान सच बोलने पर उसे डांट रहा है......
आखिर सच बोलना चाहिए या नहीं............ वो बच्चा गलत नहीं था......... हमसे ही सच सहन नहीं होता.......... हम सच भी मौका देखकर ही बोलते है......
जुबान तो अब समय  की मांग के आधार पर चलती है... सच या झूट .....हालात तय करते है.  
सच नीम की तरह  बहुत कडवा होता है, सहन कर लो तो खून साफ़ करता है.... नहीं तो मूड ख़राब ...

1 टिप्पणी:

  1. अच्छी पोस्ट ,,,,,सच ही है हम कभी कभी सच को ...समय का मोहताज बना दते है जो की गलत है ...आपकी पोस्ट अच्छी लगी

    http://athaah.blogspot.com/

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