बगल में छोरा, गली में ढिंढोरा .....

यही तो करते है हम सब....समस्या का समाधान सन्मुख होता है लेकिन समस्या को विकराल रूप देकर सारे जहाँ से समाधान मांगते फिरते है और समाधान नज़र नहीं आने पर चिंता के विशाल सागर में गोते लगाने लगते है ....|
एक भिखारी के कटोरे में चाहे जितना पैसा डाल दो.....वो तुरंत उस पैसे को निकाल कर बिछोने के नीछे छुपा देगा ताकि देखने वाले दान दाताओं को उसका प्याला खली नज़र आए और मन में उस भिखारी के प्रति दया जागे...और दान दाता आगे बढ कर उसके प्याले में कुछ पैसे डाल दे.....और फिर से भिखारी वही दोहराता है....यानि पैसो को छुपा कर फिर से कटोरा खाली कर देता है ....|
हम सभी भी शायद यही करते है.....सही समाधान को छुपा कर दुनिया भर से समाधान की भीख मांगते फिरते है.....और खुद को सबसे बड़ा भिखारी दर्शाते है.....|
कभी भगवान् से तो कभी इंसान से.....अब तो भीख मांगने की आदत सी हो गई है.....|
मेरे एक मित्र पिछले कई सालो से बहुत दुखी थे....जब भी मिलते थे...एक ही दुखड़ा रोते थे ....कि अगर मेरे पास पैसा होता तो मै इस दुनिया को दिखा देता कि मै क्या हु....मेरे पास आइडिया तो बहुत सारे है लेकिन पूंजी नहीं है.....और बिना पूंजी के इस दुनिया में क्या हो सकता है....., बात तो बिल्कुल सही है...बिना पूंजी के क्या हो सकता है....?
मैने मित्र से पूछा कि अगर में तुम्हे तुम्हारे व्यापार के लिए धन राशी उधर दे दू तो....तुम मेरा पैसा कब तक लौटा पाओगे?
वो तुरंत बोला.....तीन चार महीने के अन्दर अन्दर मै तुम्हारा सारा पैसा लौटा दूंगा....|
इतना विश्वास, अगर नहीं लौटा पाए तो.....?
अब उसके चेहरे पर एक आत्मविश्वास का समंदर था........ वो बोला...अगर में तुमारा पैसा तीन माह में नहीं लौटा पाया तो मेरा ये तीस लाख का मकान तुम्हारा हो जाएगा....|
उसके चेहरे पर आत्मविश्वास था और मेरे चेहरे पर हँसी....मैंने कहा ठीक है कुछ दिन में तुम्हे पैसे मील जायेंगे.....|
अगले दिन मैंने उससे उसकी आमदनी के और मकान के कागजाद मांगे जो उसने तुरंत दे दिए, मैंने जहाँ जहाँ कहाँ उसने हस्ताक्षर भी कर दिए....कुछ दिन बाद मैंने उसे उसके व्यापार के लिए पैसे दे दिए....उसने व्यापार किया और ये साबित कर दिया कि वाकई वो कुछ है.....|
तीन माह बाद वो मेरे पास आया और बोला ...ये लो अपना पैसा और ब्याज की राशि.....मैना कहा कुछ दिन बाद अपने कागजाद वापिस ले जाना.....|
कुछ दिन बाद मै उसे लेकर बैंक गया....वहा से मैंने उसके मकान के कागजाद वापिस दिलवाए....वो हैरान था....आखिर उसके मकान के कागजाद बैंक में कैसे?
तब जाकर उसे समझ में आया...मैंने उसका मकान बैंक में गिरवी किया था.... वो काफी गुस्से में था....मुझसे पूछे बिना तुमने मेरा मकान गिरवी कैसे रख दिया...अगर मै पूंजी नहीं लौटा पाता तो?
.....मै मुस्कुराया.....अरे जब तुम्हे खुद पर इतना विश्वास था तो फिर डर कैसा.....मैना तुम्हारा ही मकान गिरवी रख कर तुम्हारी मदद की है.....समाधान तुम्हारे अपने पास था.... लेकिन तुम अपना दुखड़ा लेकर मेरे पास आए.....|
हम सभी ऐसा करते है....दोस्तों....समस्या बहुत डरपोक होती है....ये कभी अकेले नहीं घुमती है....ये हमेशा अपने साथ समाधान लिए घुमती है....बस वो हमें नज़र नहीं आता....क्यों कि हमारी आँखों पर तो भय और चिंता का चश्मा लगा होता है.... दोस्तों....जब भी कोई समस्या आये तो उसके आगे पीछे....आजू बाजू.... ध्यान से देखना ...आपको समाधान जरुर नज़र आएगा.....|

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी रचना पोस्ट की है ........


    जाने काशी के बारे में और अपने विचार दे :-
    काशी - हिन्दू तीर्थ या गहरी आस्था....

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  2. क्या बात है.. मजा आ गया...

    "...सही समाधान को छुपा कर दुनिया भर से समाधान की भीख मांगते फिरते है.."

    "जोधपुरी" खिंच लाया तुम्हारे ब्लॉग तक...

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