अयोध्या ....ना सांप मरा और ना लाठी बची .....

क्या वाकई राम जन्म भूमि का सांठ साल पुराना मुद्दा हल हो गया या एक नहीं शुरुआत हुई है ?
कई इंसान भूखे हो और हर एक को रोटी का एक एक निवाला दे दिया जाए तो क्या किसी की भी भूख मिट सकती है ?
मै ये नहीं जानता कि कौन सही और कौन गलत है लेकिन इतना जानता हु कि ये फैसला उचित नहीं है |
अगर आपके घर पर कोई अपना अधिकार जताए और झगडे का फैसला ये आये कि आप अपना आधा घर उसे दे दो ताकि आप दोनों प्यार से, अमन से रह सको....तो क्या आप अपना आधा घर उसे दे दोगे ?
नहीं, हरगिज नहीं....हम अपना मकान किसी से कैसे बाँट ले .... कोर्ट का फैसला सिर्फ मामले को शांत करने की एक कोशिश है ....इन्साफ हरगिज नहीं |
कोर्ट का काम सही सही इन्साफ करना है ना कि दोनों पक्षों को राज़ी रखने की कोशिश करना....सही फैसले से किसी एक पक्ष को कुछ पल का दर्द तो होगा ही... लेकिन गलत फैसला सुनकर दोनों पक्षों को उम्र भर का दर्द देना कहा की समझदारी है....|
एक पुरानी फिल्म का गीत याद आ रहा है...."दुखी मन मेरे सून मेरा कहना ...जहाँ नहीं चैना वहा नहीं रहना.... आधी आधी जमीं बाँट कर उम्र भर का झगडा... कितने लोग इसे समझदारी का फैसला मानते है ?
आपकी जमीं पर नाजायज़ कब्ज़ा करने वाला अगर आपकी नजरो के सामने आ जाए तो क्या आपको गुस्सा नहीं आएगा...और अगर वो हमेशा आपकी नजरो  के सामने ही रहे तो..... भाई मेरा तो खाना पीना ...सोना उठना सब हराम हो जाएगा....आप किस मिटटी के बने हो....मै नहीं जानता...|
ये फैसला तो मै पहले से ही जानता था....इसके लिए इतने नाट्य क्रम की क्या आवश्यकता थी....रास्ट्रीय धन का इतना अपव्यय करके भी क्या दिया ....वही ढ़ाक के तीन पात.....सरकार को तो अपना उल्लू सीधा करना है... और क्यों ना हो....वोट बैंक तो दोनों तरफ है.....वो कहते है ना....लड्डू भी मील जाए और बर्फी भी.....|
दोनो हाथो में अलग अलग चाकलेट लेकर एक बच्चे से ये पूछो...बोल कौनसी लेगा....तो वो फैसला नहीं कर पायेगा....उसकी नज़रे दोनों पर रहेगी....यही हाल हमारी सरकार का है....किसी एक पार्टी को खुश और एक को नाराज़ नहीं कर सकती... फिर चाहे दोनों....उम्र भर लड़ते ही रहे.....|
मेरा भारत महान....|




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