खरबूजे को देख खरबूजे ने रंग नहीं बदला...

दुनिया बहुत एडवांस हो गई है........ हर कोई दोगुनी तिगुनी रफ़्तार से भाग रहा है...कहा भाग रहा है............और आखिर क्या चाहता है.......शायद ही किसी को पता होगा....रही सही कसर इस कमबख्त टी.वी. ने पूरी कर दी.... इतने सुनहरे सुनहरे सपने दिखाती है कि कोई भी इसके माया जाल में फस जायेगा.... वैसे सारी गलती टी.वी. की भी नहीं है...इसने तो हमें अपने नाम से ही आगाह कर दिया था.....टेली विज़न .....टेली यानि दूर और विज़न यानि दर्शन ....यानि दूर के दर्शन ......और सभी ने  एक कहावत तो सुनी होगी....  "दूर के ढोल सुहावने...." ये टी.वी. के मन लुभावने सपने भी दूर से ही अच्छे लगते है.....
एक  बार मेरे एक बिगड़े हुए  मित्र ने मेरे मोबाइल पर एक भद्दा सा एस.एम्.एस. भेजा.... वो कुछ इस प्रकार था..." दूर से देखा ... हसीना बाल सुखा रही है.... पास गए तो देखा गाय पूछ हिला रही है...." एस.एम्.एस भद्दा जरुर था लेकिन कितनी गहरी बात समझा गया...ये टी.वी. भी उस हसीना की तरह ही है....दूर से हसीना.......पास से गाय..... बल्कि गाय भी नहीं.....एक भड़का हुआ सांड.... ...जो आपको किसी भी लायक नहीं छोड़ता..... इसके मोह पाश में हम इतना मदहोश हो जाते है कि अपना सबकुछ खो बैठते है.... और जब होश आता है तो हाथ मलने के सिवाय कुछ नहीं कर पाते है......
गृहणिया इससे देख देख कर रसोई घर नए नए प्रयोग करती है और अपने भोले भले पति पर आजमाती है.......
बच्चे कार्टून की दुनिया में इतना रच बस जाते है कि खुद चले फिरते कार्टून ही नज़र आते है......
युवा पीढ़ी की तो बात ही छोडो...... फ़िल्मी सितारों और टी.वी. कलाकारों.......की चकाचोंध में अपना वजूद ही खो बैठे है  .... युवा डुप्लीकेट शाहरुख़ खान, सलमान खान और सैफ अली खान बने घूम रहे है तो युवतिया कैटरिना कैफ, करीना कपूर और मल्लिका शेरावत जैसा नज़र आने का प्रयास कर रही है........इन सब के बीच हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार ........तो जैसे खो ही गए है..... आज दादा - दादी ...नाना - नानी को बच्चो को सुनाने के लिए कहानिया सोचनी नहीं पड़ती... वो अपने ज़माने की किस्से सुना देंगे और बच्चे राजा रानी की कहानी समझ कर सो जायेंगे.......  बच्चे ही क्या.... मै भी जब उस ज़माने के किस्से सुनता हु तो विश्वाश नहीं होता....सादगी....सरलता.....और सच्चाई से भरी हुई...... किसी दूसरी दुनिया की कहानी कहानी लगती है.....
टी .वी. ने हमें सच्चाई से बहुत दूर कर दिया है....... आँखों पर झूठ का चश्मा लगाकर देखेंगे तो भला सच्ची दुनिया.....सच्चे रिश्तो  और सच्चे किस्सों पर यकीन कैसे कर पाएंगे...?

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