लेखक को नहीं बल्कि लेखनी को देखो....

अकबर ने फ़रमाया " मुझे भूख लगी है एक खरबूजा दे, ये तो ख़त्म हो गया अब दूजा दे..." सारे दरबारी बोले...वाह वाह...वाह वाह....ये तारीफ़ शायरी की नहीं बल्कि अकबर की थी ....क्यों कि बुराई करने की हिम्मत किसी में थी ही नहीं...|
फेसबुक पर भी मैंने अक्सर ये महसूस किया है कि वो तानाशाही आज भी जिन्दा है....आज डर से ना सही पर दिल से तो मजबूर है ही.....राम कहे....मोहन कहे....या कहे कोई विसंक जोधपुरी ...तो शायद वाह वाह ना मिले ....कोई आपकी बात पर घोर भी ना करे ....पर अगर जुली कहे.....टीना कहे....या कहे कोई रुख्सार तो तारीफ़ करने वालो की कतार लग जायेगी |
मैंने देखा है कि एक कमसिन ने कहा " आई लव माय इंडिया " तो हज़ार लोगो ने कहा वाह वाह ....क्या ऊच विचार है....लेकिन ये नहीं देखा कि उसी कमसिन ने अपने अकाउंट में सिर्फ पुरुषो को जोड़ा है....क्यों ?
क्यों कि झूटी तारीफ़ करने की आदत महिलाओं की नहीं होती...|
अरे नासमझो, जिसे कमसिन मानकर चेट कर रहे हो...सेट कर रहे हो....वो तो चार बच्चो की अम्मा है....बस फोटो किसी फ़िल्मी हिरोइन की लगा रखी है.....|
बंद करो ये गोरखधंधा ...अब आदमी नहीं है अँधा..... हम फेसबुक पर ज्ञान बांटने आते है....ना कि चरित्र हीनता....तो आज के बाद अगर मैंने किसी को किसी की झूटी तारीफ़ करते देख लिया तो .....मै लड़की के भेष में उसे सबसे ज्यादा परेशान करूँगा...|
यार, लेखक को नहीं बल्कि लेखनी को देखो....शब्दों की सच्ची तारीफ़ करना सीखो|

1 टिप्पणी:

  1. हम फेसबुक पर ज्ञान बांटने आते है....ना कि चरित्र हीनता....

    बहुत सटीक बात कही है .. धन्यवाद.

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